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विधि तुच्छ कार्यों पर ध्यान नहीं देती है

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  विधि तुच्छ कार्यों पर ध्यान नहीं देती है(De minimis non curat lex,   Law does not take account of trifles) यही कारण है कि अपराधिक  दंड संहिता में तुच्छ कार्यों यानी कि बेकार के कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया हैl दोस्तों हमारे दैनिक जीवन में बहुत से ऐसे कार्य होते रहते हैं जो कि बेकार के कार्य होते हैं यानी कि तो शिकारी होते हैं अगर उन सभी पर कानून का ध्यान रहेगा तो कोर्ट में असीमित केस की संख्या बढ़ जाएगी और उनका निपटारा होना लगभग असंभव ही हो जाएगाl ऐसे भी हम लोग देखते हैं दोस्तों की जो केस भी कोर्ट में पेंडिंग है उसका निपटारा होने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में अगर तुच्छ कार्यों के मामले कोर्ट में पहुंचने लगे तो कोट उनका निपटारा कैसे कर सकेगा इन्हीं कारणों से दोस्तों कानून  तुच्छ बातों पर ध्यान नहीं देती हैl जैसे उदाहरण के रूप में हम लोग ले सकते हैं कि कहीं पर गाड़ी खड़ी है और उस पर दो-तीन मुक्का मारते हुए गाड़ी में बैठना, किसी व्यक्ति के नाम से दातुन तोड़ लेना, किसी की दवात में कलम डुबो देना, यह सब ऐसे कुछ कार्य हैं दोस्तों कि इनका म...

भारतीय दंड संहिता में

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भारतीय दंड संहिता की धारा 436 में

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भारतीय दंड संहिता:

 भारतीय दंड संहिता:आधिपत्य से अभिप्राय   " आधिपत्य से अभिप्राय यहाँ मध्यवर्ती ( mediate ) अथवा तात्कालिक ( immediate ) दोनों प्रकार के आधिपत्य से हैl यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस धारा में प्रयुक्त शब्द ' सम्पत्ति ' से अभिप्राय मूर्त अचल सम्पति ' ( immovable corporeal property ) से है न कि अमूर्त सम्पति ( incorporeal property ) सेl  2.यदि प्रवेश विधिपूर्ण हो , तो ऐसी सम्पत्ति पर अविधिपूर्णतया बना रहना यदि किसी सम्पति में या पर विधिपूर्ण तरीके से प्रवेश किया जाता है तो आपराधिक अतिचार का अपराध गठित नहीं होता । लेकिन यदि ऐसे प्रवेश किये जाने के पश्चात् वहां अविधिपूर्णतया ( unlawfully ) बना रहा जाता है , तो वह आपराधिक अतिचार का रूप ले लेता है ।  3. कोई अपराध कारित करने के आशय में प्रवेश करना या अविधिपूर्णतया बने रहना आपराधिक अतिचार का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व है कोई अपराध कारित करने के आसे प्रवेश करना अथवा अविधिपूर्णतया वहाँ बने रहना । जहाँ किसी बैंक के कर्मचारियों ने कार्यालय में प्रवेश कर दिन भर शान्तिपूर्ण तरीके से ' कलम रोको ' हड़ताल की तथा बैंक के उच्च अधिकारी द्वारा...

ipc section 341 Wrongful Restraint

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IPC Section 322

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ठग के लिए दंड के प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 311

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आईपीसी की धारा 420 के अंतर्गत अपराध एक संज्ञय अपराध है

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साशय एक स्त्री को क्षुब्ध करने के लिए उसके चेहरे

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यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के अंतर्गत

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दक्षायणी वेलायूधन का जन्म 1912 में

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किसी अपराध को

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IPC section 306

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IPC section 307

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पत्नी अगर शिक्षित है तो पति उसे पैसा कमाने

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कानूनी मटेरियल भी......B.C.I.

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पति और पत्नी एक साथ

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Custodial Death:

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Custodial Death:

Custodial Death: कस्टोडियल डेथ यानी कि पुलिस हिरासत में पुलिस के अत्याचार के द्वारा बंदी की मौतl जब पुलिस हिरासत में किसी बंदी की पुलिस की  पिटाई के कारण बंदी की मौत हो जाती है तब इसे कस्टोडियल डेथ करते हैंl 27 वर्ष का एक युवक जिसका नाम जमाल हुसैन था  दुबई में एक क्लीनर का काम करता था, छुट्टियां मनाने के लिए अपने घर आया था अपनी पत्नी बच्चों और मां के साथ और दो-तीन दिन बाद 22 सितंबर 2021को दुबई लौटने ही वाला था 14 सितंबर 2021को 6/7 पुलिसकर्मी रात को करीब 11:30 बजे उसके घर पर आए और बेरहमी से उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे थाना ले गए लॉकअप में बंद कर दिए,पहले से ही लॉकअप में एक व्यक्ति जिसका नाम रंजीत देबनाथ था उसने बताया कि जमाल को लॉकअप लाया गया तो वह काफी रो रहा था उसके सीने में भी काफी दर्द की शिकायत थी सुबह होने पर जब पुलिसकर्मी ने उसे उठाने का प्रयास किया तो उन्होंने उसे मृत पाया पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने आईपीसी की धारा  304/34 लगा दियाl माझा के लिए 5000000 का मांग किया गया था पर 1000000 ही मुआवजा दिया गया दिया गयाl 

I.P.C. Section 149

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